दुर्ग शहर की राजनीति को नया रूप देने कार्पोरेशन मेंबर्स का ट्रेन से केरल टूर बड़े नेता सीधे फ्लाईट से पहुंचेंगे

दुर्ग शहर की राजनीति में भाजपा और कांग्रेस के पार्षदों का मिलाजुला पॉवर फूल ग्रुप तैयार हो गया है बुलडोजर जैसा ही है और इसका असर शहर सरकार पर भी देखा जा सकता है रोज शाम को निगम के कामों की अलग से समीक्षा बैठक होती है फिर आगे की रणनीति तैयार की जाती है इस पर कोई पार्टी विशेष का नियंत्रण नहीं है क्योंकि पूर्व के कांग्रेस कार्यकाल में भी शहर सरकार की स्थिति लगभग यही थी उस समय भी सत्ता पक्ष के पार्षद ही बजट अभिभाषण से लेकर हर प्रस्ताव का तीव्र व तीखा विरोध करते थे तो अब भाजपा शासन काल में भी गुटीय स्थिति लगभग बराबर है यहां भी सता पक्ष के पार्षद ही शहर सरकार के विरोध करते दिखते हैं अब समझते हैं भाजपा और कांग्रेस पार्टी का नियंत्रण केंद्र के बारे में दुर्ग जिला में दोनों ही पार्टी कार्यालय में संगठन प्रमुख पार्टी केंद्र के द्वारा दिए गए कार्यों को ही प्राथमिकता से करते हैं उन्हें शहर सरकार, जन पद, जिला पंचायत, विधानसभा और लोकसभा के नेतृत्व कर्ता को झेलना ही पड़ता है इसलिए वे इन सब के बीच समन्व नहीं बना पाते हैं और स्थिति परिस्थितियों के अनुसार ही कार्य करते रहते हैं पूर्व में प्रदेश में जब कांग्रेस सरकार थी तब सभी शहर सरकारों जनपद और जिला पंचायतों में उनका कब्जा था वही स्थिति आज भाजपा की ट्रिपल इंजन सरकार की है अब बात करते हैं इस गुटबाजी का नफा नुकसान कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दालों को समान रूप से होता है पहले 50 वर्षों तक कांग्रेस सता में थी तो निरंकुश हो गई थी फिर भाजपा 15 वर्षों तक थी तो निरंकुश थी फिर 5 वर्ष कांग्रेस आयी तो घमंड चढ़ गया अब भाजपा फिर से आयी तो फिर वही वर्षस्व की लड़ाई कांग्रेस पार्टी से जुड़े लोगों को उनका निजी काम भी नहीं किए जाने दिया जा रहा है उन्हें मजबूर कर दिया गया है किंतु ऐसे नेताओं को ये जान लेना चाहिए कि राजनीति करने वालो के घर शीशे के होते हैं दूसरे के घर पर पत्थर नहीं फेंकना चाहिए क्योंकि दूसरे की बारी नहीं आएगी ये सोचना आज की भूल हो सकती है

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