Untold Story बस्तर से कैसे खत्म हुआ लाल आतंक "नक्सलवाद का अंत"
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छत्तीसगढ़ में हथियार बंद माओवादी उग्रवाद का अंत हो गया भूमकाल आंदोलन में अंग्रेजों के समय से जो तथाकथित शोषण कर्ताओं द्वारा बस्तर के भोले भाले आदिवासीयों, किसानों और ग्रामीणों को प्रताड़ित करने का उपक्रम चले आ रहा था अंग्रेजों के बाद माओवादी संगठन ने उसकी जगह ले ली और वनवासियों को जल जंगल जमीन बचाने का आंदोलन चलाने के नाम पर भारत की विकास की मुख्यधारा और संवैधानिक ढांचे से दूर रखने का काम किया भारत के संविधान के बारे में न जान पाए वनवासी इसलिए स्कूल तक नहीं खुलने दिया रास्ते बंद करने के काम में लगे रहे दहशत इतनी रखी कि विधायक सांसद तक अपनी आवाज बुलंद नहीं कर पाए इसमें माओवादियों के उन नेताओं का हाथ था जो जानते थे कि वनवासियों का विकास हुआ तो उनकी सत्ता चले जायेगी बंदूकों हथियारों के दम पर अपनी दहशत कायम रखी नक्सल वाड़ी पश्चिम बंगाल में जब जमीदारों के अत्याचारों से तंग आकर किसान आंदोलन चले तो उसने पूरे देश में अपनी एक अलग पहचान बना ली देश के अन्य भागों में जहां सरकार नहीं पहुंच पा रही थी या यह कहे कि मध्यप्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, आंध्रप्रदेश और महाराष्ट्र जैसे इतने बड़े बड़े प्रदेश थे जो भौगोलिक दृष्टि से क्षेत्रफल में इतने बड़े थे कि राज्य के अंतिम छोर तक पहुंचने तीन दिन तक लग जाते थे तो सरकारी आदेश को पूरे तीस 30 दिन लग जाते थे सरकारी तंत्र में तो अधिकारियों और कर्मचारियों का ट्रांसफर इन दुरुस्त अंचल जैसे बस्तर, गढ़चिरौली , तेलंगाना, झारखंड के संथाल परगना, उड़ीसा के कालाहांडी - मलकानगिरी , पश्चिम बंगाल में रानीगंज इस्लामपुर में किया जाना कोई पानिसमेंट जैसा ही होता था जो सरकार बने वे अपने अपने चहेतो को राजधानी के पास या अच्छे शहरी इलाकों में रखे जिन अधिकारियों और कर्मचारियों से न पटे तो उन्हें जंगल और दूर दराज के इलाकों में भेजे इस प्रकार ये सरकारें बदले की भावना को अंजाम देने में अपनी आधी शक्ति लगा दे तो आधी शक्ति भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाया करती थी तथा कुल मिलाकर सरकार का विकास आधा अधूरा रास्ते में ही अटक जाए ये उपक्रम आजादी से लेकर लगभग 50 वर्षों तक बदस्तूर चला फिर केंद्र की अटल बिहारी सरकार ने इन राज्यों का दायरा छोटा कर तीन नए राज्य बनाए छत्तीसगढ़,झारखंड और तेलंगाना किंतु वे भी गठबन्धन दबाव की राजनीति के चलते महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा जैसे बड़े राज्यों को कुछ नहीं कर सके और माओवाद से आतंकवाद तक देश और राज्य स्तर पर एक बड़ी समस्या के रूप में उभरते गया चूंकि राजनैतिक दल खुद ही के प्रपंच में उलझे रहते थे अन्य दलों के साथ बड़े नेताओं के रिश्ते कुछ इस कदर जुड़े थे कि राजनीति से व्यापार और व्यापार से राजनीति करने वाले इन सब का दखल हर पार्टी पॉलिटिक्स में देखा जा सकता है जनता जो बिचारी अपनी रोजी रोटी में जुटी रहती हो उसे कैसे इन साठगांठ और राजनीति के उथल पुथल के बारे में मालूम चले और पता भी चले तो केवल चौक चौराहे और गली नुक्कड़ में आपसी विवादों के मजे का विषय बनकर रह जाए करता है इसलिए इन सब कारणों से माओवाद नक्सलवाद की जड़े इतनी गहरी होती गई कि आजादी के बाद 50 वर्षों तक कई सरकारें आई और गई किंतु आंतरिक सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठा सकी राज्य सरकारों और केंद्र सरकार में सामंजस्य बन ही नहीं पाता था और सरकारी सुरक्षा एजेंसियां भी कोई साझा कार्यक्रम नहीं बना पाती थी जिससे कि इस आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी गंभारी नक्सली आतंकवादी समस्या को हल किया जा सके परिणाम स्वरूप पुलिस फोर्स और सेना के कई जवान अलग अलग घटनाओं में हुई हिंसा में शहीद हो गए सलवा जुडूम से शुरू हुए नए संघर्ष अभियान के बाद से मार्च 2026 तक लगता था कि इसका अंत नहीं होने वाला है किंतु केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह व सरकार की सीधे टारगेट देने के संकल्प के बाद माओवादियों और नक्सलियों की कमर टूट गई कि मार्च 2026 तक सरेंडर करें आतंकवादी नहीं तो खात्मा तय है के सामने लगभग सभी नक्सली नेताओ ने हथियारों के साथ सरेंडर कर दिया सरकार ने अपनी पुनर्वास नीति में बदलाव किया जिससे युवा और बुजुर्ग हो चले नक्सलियों ने बखूबी समझते हुआ हथियार छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हो गए और आतंक के युग का अंत हो गया इस अभियान में भारत माता के जिन सपूतों ने अपने प्राणों की आहुति दिया उनमें से एक थे रायपुर निवासी 2013 बैच के पुलिस अधिकारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आकाश राव गिरपुंजे जिनकी 9 जून 2025 को सुकमा जिले के कोंटा थाना क्षेत्र अंतर्गत सर्चिंग के दौरान आईईडी ब्लास्ट में जान गई वीरगति को प्राप्त हुए शासन ने उन्हें राजकीय सम्मान दिया उनकी पत्नी को डीएसपी पद पर सम्मान पूर्वक अनुकंपा देते हुए उनके दो छोटे छोटे मासूम बच्चों को स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक की व्यवस्था का आश्वासन दिया गया है जो छत्तीसगढ़ और केंद्र सरकार का सराहनीय कदम है केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के साथ ही साथ छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री व गृह मंत्री विजय शर्मा साधुवाद के पात्र हैं कि उन्होंने शहीद आकाश राव गिरपुंजे की शहादत का पूर्ण सम्मान प्रदान किया जिससे रायपुर जो कि शहीद आकाश राव गिरपुंजे का गृह निवास था के परिजन के साथ साथ सम्पूर्ण परिवार समाज और प्रदेश के पुलिस फोर्स सेना के परिवार सभी के लिए सम्मान का विषय है कि स्वर्गीय शहीद आकाश राव गिरपुंजे की शहादत के एक वर्ष 9 जून 2026 को होने वाले हैं के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के कार्यक्रम को एक भव्यता प्रदान करें














